विकासनगर से निकले उस नेता की पुण्यतिथि, जिसने पहाड़ के गांवों में रसोई गैस पहुंचाने का देखा था सपना

देहरादून के विकासनगर क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित ब्रह्मदत्त शर्मा की आज पुण्यतिथि है। 5 अक्टूबर 2014 को उनके निधन से उत्तराखंड ने एक ऐसे जननेता को खो दिया, जिसने पहाड़ की मूलभूत जरूरतों और विकास की चिंता को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंचाने का काम किया।

ब्रह्मदत्त शर्मा को उत्तराखंड के लोग एक ऐसे विकास पुरुष के रूप में याद करते हैं, जिनकी सोच केवल सत्ता और राजनीति तक सीमित नहीं थी। पहाड़ के गांवों की समस्याओं को उन्होंने करीब से समझा और उन्हें नीति-निर्माण के स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया।

पेट्रोलियम मंत्री के रूप में उनका एक महत्वपूर्ण प्रयास पहाड़ी क्षेत्रों तक रसोई गैस की पहुंच बढ़ाना था। उस दौर में पहाड़ के अधिकांश ग्रामीण परिवार खाना पकाने के लिए जंगल से लकड़ी पर निर्भर थे। इससे महिलाओं की मेहनत बढ़ती थी और जंगलों पर भी दबाव पड़ता था। ब्रह्मदत्त शर्मा ने पहाड़ी क्षेत्रों में गैस पहुंचाने की पहल को पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण जीवन को आसान बनाने से जोड़कर देखा। खास बात यह रही कि पहाड़ी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की कीमत मैदानी क्षेत्रों के समान रखने की दिशा में भी पहल की गई।

उनका मानना था कि पहाड़ के लोगों को विकास की सुविधाएं उनके घर तक मिलनी चाहिए। गैस जैसी बुनियादी सुविधा पहाड़ तक पहुंचाना केवल सुविधा उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि यह जंगलों को बचाने, महिलाओं का श्रम कम करने और ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम था।

ब्रह्मदत्त शर्मा का राजनीतिक सफर भी संघर्ष और उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत लखनऊ के नवक्रांति अखबार में पत्रकार के रूप में की। राजनीति में उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का मार्गदर्शन मिला। बाद में एनडी तिवारी के मार्गदर्शन में वह कांग्रेस से जुड़े और 1980 में मसूरी से विधायक चुने गए।

इसके बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई। 1984 और 1989 में वह टिहरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए। 1989 में राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने जिम्मेदारी संभाली और पेट्रोलियम तथा वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व निभाया।

उनकी राजनीतिक यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचने के बावजूद उनकी चिंता पहाड़ और पहाड़ के आम लोगों से जुड़ी रही। विकासनगर और पछवादून की धरती से निकलकर दिल्ली की सत्ता के गलियारों तक पहुंचने वाले ब्रह्मदत्त शर्मा ने उत्तराखंड की समस्याओं को राष्ट्रीय विमर्श में स्थान दिलाने का काम किया।

आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल एक पूर्व केंद्रीय मंत्री को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उस राजनीतिक सोच को नमन करना है जिसमें पहाड़, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और आम आदमी की जरूरतें विकास की प्राथमिकता थीं।

ब्रह्मदत्त शर्मा आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन पहाड़ के विकास और जनसरोकारों से जुड़ी उनकी सोच उन्हें हमेशा जीवित रखेगी। पुण्यतिथि पर विकास पुरुष पंडित ब्रह्मदत्त शर्मा को विनम्र श्रद्धांजलि।

By Mukesh Juyal

संपादक, आत्ममंथन जन मुद्दों का एक पक्षकार