विकासनगर/हरिपुर। लोक पंचायत जमुना तीर्थ समिति ने हरिपुर स्थित यमुना घाट और मां यमुना की प्रतिमा स्थापना को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। समिति ने कहा कि वर्ष 2016 से हरिपुर में यमुना घाटों के निर्माण और मां यमुना की प्रतिमा स्थापना के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यमुना घाट एवं यमुना कृष्ण धाम का शिलान्यास किया। वर्तमान में घाट निर्माण का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और समिति ने दूसरे चरण के कार्यों के लिए भी मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है।

समिति ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से जौनसार-बावर के प्रवेश द्वार हरिपुर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा मिली है।

समिति के अनुसार, पूर्व निर्धारित योजना के तहत ब्रिटिशकालीन पुल के पिलर पर मां यमुना की 21 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जानी थी। करीब 22 लाख रुपये की लागत से तैयार यह प्रतिमा अहमदाबाद से हरिपुर पहुंच चुकी है।

समिति ने बताया कि 25 जुलाई को पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने प्रतिमा स्थापना का विरोध करते हुए हरिपुर पुल पर धरना दिया और कहा कि वह इस ब्रिटिशकालीन पुल को “श्याम सेतु” के रूप में विकसित कर रहे हैं। इस बयान के बाद क्षेत्र में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

लोक पंचायत जमुना तीर्थ समिति ने कहा कि वह श्री नौटियाल के “श्याम सेतु” प्रस्ताव का स्वागत करती है। समिति ने उन्हें शासन से इसकी सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त करने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। समिति ने उम्मीद जताई कि इस अवधि में यदि शासन से स्वीकृति मिल जाती है तो क्षेत्रवासियों की भावनाओं के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।

समिति का कहना है कि रामशरण नौटियाल वर्ष 2022-23 से इस पुल को श्याम सेतु बनाने की बात कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। समिति ने दावा किया कि पिछले दो दिनों में संबंधित विभागों से जानकारी लेने पर पता चला कि श्याम सेतु निर्माण से संबंधित कोई शासनादेश अब तक जारी नहीं हुआ है।

समिति ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समयसीमा में श्याम सेतु को शासन की स्वीकृति नहीं मिलती है तो वह मां यमुना की प्रतिमा को उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने के लिए स्वतंत्र होगी। साथ ही कहा कि वर्तमान में प्रतिमा विरोध के कारण हरिपुर में खुले आसमान के नीचे सुरक्षित ढककर रखी गई है। समिति ने यह भी कहा कि प्रतिमा को किसी प्रकार की क्षति होने पर इसकी जिम्मेदारी रामशरण नौटियाल की होगी, क्योंकि उनके विरोध के कारण ही प्रतिमा की स्थापना नहीं हो सकी है।

पत्रकार वार्ता में समिति ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में रामशरण नौटियाल द्वारा नवीन चकराता बसाने तथा हरिपुर में पार्किंग सहित कई विकास कार्यों की घोषणाएं की गई थीं, लेकिन वे धरातल पर साकार नहीं हो सकीं। ऐसे में क्षेत्र की जनता उनकी नई घोषणाओं को लेकर संशय में है।

समिति ने कहा कि वह जौनसार-बावर की लोक संस्कृति एवं धार्मिक आस्था के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है तथा हरिपुर घाटों के निर्माण में उसकी सक्रिय भूमिका रही है। समिति का दावा है कि घाट निर्माण में रामशरण नौटियाल का कोई योगदान नहीं रहा है। यदि मां यमुना की प्रतिमा स्थापना का विरोध राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है तो उसके परिणाम संबंधित पक्ष को स्वयं भुगतने होंगे।

पत्रकार वार्ता में लोक पंचायत जमुना तीर्थ समिति के सचिव सतपाल चौहान, सदस्य श्रीचंद शर्मा, अनिल तोमर, प्रीतम सिंह चौहान, केसर नेगी, पंडित शिवानंद, रणवीर सिंह तोमर, कांति चौहान, चंचल सिंह चौहान, सुरेश चौहान सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

By Mukesh Juyal

संपादक, आत्ममंथन जन मुद्दों का एक पक्षकार