विकासनगर। विकासनगर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष हरफूल चंद महावर के निधन से नगर में शोक की लहर है। सहज और सरल स्वभाव के महावर का जीवन सादगी से भरा रहा। व्यवसाय के क्षेत्र में सफल रहने के साथ ही उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में भी अपनी अलग पहचान बनाई। पद की ऊंचाई के बावजूद उनके व्यवहार में कभी दिखावा नजर नहीं आया। यही सादगी और अपनापन उन्हें लोगों के करीब रखता था।

हरफूल चंद महावर का नगर पालिका अध्यक्ष बनने का सफर भी अपने आप में यादगार रहा। चुनाव में उन्हें महज छह वोट से हारा हुआ घोषित किया गया था। परिणाम से असहमत महावर ने हार स्वीकार करने के बजाय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने चुनाव परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी और दोबारा मतगणना की मांग की।

मामला न्यायालय पहुंचने के बाद दोबारा मतगणना कराई गई। पुनर्मतगणना में दोनों प्रत्याशियों के मत बराबर आने के बाद मामला फिर न्यायालय की प्रक्रिया में पहुंचा। अंततः न्यायिक प्रक्रिया के बाद महावर को विजेता घोषित किया गया। इसके बाद उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में विकासनगर की जिम्मेदारी संभाली। नगर पालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उनका अध्यक्षीय कार्यकाल 20 अक्तूबर 2016 से तीन मई 2018 तक रहा।

सभासद से पालिकाध्यक्ष तक पहुंचे महावर की राजनीति हमेशा स्थानीय सरोकारों से जुड़ी रही। नगर की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर वे सक्रिय रहे। अध्यक्ष पद संभालने के बाद भी उनका व्यवहार आम लोगों से वैसा ही बना रहा, जैसा राजनीतिक जीवन में आने से पहले था।

सादगी उनकी सबसे बड़ी पहचान

हरफूल चंद महावर को करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि उनका व्यक्तित्व बेहद साधारण था। वे सामान्य रहन-सहन और सहज व्यवहार में विश्वास रखते थे। किसी भी व्यक्ति से बिना किसी औपचारिकता के मिलना और अपनी बात सरल तरीके से रखना उनकी आदत में शामिल था। राजनीतिक पद मिलने के बाद भी उन्होंने खुद को आम लोगों से अलग नहीं किया।

व्यवसाय के क्षेत्र में उन्होंने सफलता हासिल की, लेकिन उनकी जीवनशैली में उसका प्रदर्शन कभी दिखाई नहीं दिया। यही वजह रही कि राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में अलग-अलग विचार रखने वाले लोगों के बीच भी उनके व्यक्तिगत संबंध बने रहे।

छह वोट की हार से न्यायालय तक का सफर

नगर पालिका चुनाव में छह मतों से हार घोषित किए जाने के बाद महावर का न्यायालय जाना उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा। वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद जब उन्हें जीत मिली तो यह विकासनगर की नगर निकाय राजनीति की चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया। अध्यक्ष पद मिलने के बाद उन्होंने करीब डेढ़ वर्ष तक नगर पालिका की जिम्मेदारी संभाली।

महावर के निधन से विकासनगर ने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया, जिसकी पहचान केवल नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसायी, पूर्व सभासद और सहज-सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में भी रही। उनके परिचितों और समर्थकों के बीच उनकी सरलता, अपनापन और बिना किसी तामझाम के जीवन जीने की शैली लंबे समय तक याद की जाएगी।

By Mukesh Juyal

संपादक, आत्ममंथन जन मुद्दों का एक पक्षकार