माटोगी समेत छह गांवों में 1938 के बाद नहीं हुआ भू-सर्वेक्षण, खसरा 8486 के लेन-देन पर रोक की मांग

विकासनगर। बिन्हार क्षेत्र में भूमि बंदोबस्त का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से सामने आया है। भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को भेजे मांगपत्र में बिन्हार के छह गांवों में लंबे समय से लंबित भू-सर्वेक्षण एवं भूमि बंदोबस्त की प्रक्रिया विधानसभा चुनाव 2027 से पहले शुरू कराने की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इन गांवों में अंतिम बंदोबस्त वर्ष 1938 में हुआ था।

किसान संघ के मुताबिक माटोगी, मर्दसू, भलेर, बावनधार, पपड़ियान और पष्टा में 88 वर्षों से नया भू-सर्वेक्षण नहीं हुआ है। इसके चलते किसानों को भूमि अभिलेखों से जुड़े कार्यों और जमीन संबंधी मामलों के निस्तारण में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संघ का कहना है कि क्षेत्र के ग्राम प्रधान और जनप्रतिनिधि पिछले 10-15 वर्षों से बंदोबस्त की मांग उठाते आ रहे हैं।

खसरा 8486 के लेन-देन पर रोक की मांग

भारतीय किसान संघ ने मांगपत्र में खसरा संख्या 8486 के बार-बार होने वाले क्रय-विक्रय पर रोक लगाने की मांग भी की है। संघ ने बंदोबस्त पूरा होने तक इस खसरे के लेन-देन पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही बिन्हार क्षेत्र में पूर्व में जारी भूमि आवंटन पट्टों की जांच कराने की मांग की गई है।

संघ का आरोप है कि कुछ पट्टों के अनियमित तरीके से विक्रय और कब्जे से जुड़े विवाद हैं। ऐसे मामलों की जांच कर अनियमितता मिलने पर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।

चुनाव से पहले कार्रवाई की मांग

किसान संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि बिन्हार की भूमि संबंधी समस्याओं का समाधान विधानसभा चुनाव 2027 से पहले शुरू किया जाए। मांगपत्र में किसानों की अन्य समस्याओं के साथ बिन्हार के सड़क से वंचित गांवों में सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग भी शामिल है।

भारतीय किसान संघ के प्रदेश कोषाध्यक्ष नरेश चंद्र नौटियाल सहित पदाधिकारियों ने मांगपत्र के माध्यम से शासन-प्रशासन से बिन्हार की वर्षों पुरानी भूमि संबंधी समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।

By Mukesh Juyal

संपादक, आत्ममंथन जन मुद्दों का एक पक्षकार