मंत्री को सिर्फ अपने आर्थिक संसाधन बढ़ाने की चिंता, हर मोर्चे पर विफल मंत्री को सरकार करे बाहर : नेगी
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने प्रदेश के शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत करीब 750 बीआरपी-सीआरपी कार्मिक पिछले दो माह से वेतन के इंतजार में हैं, लेकिन विभागीय मंत्री धन सिंह रावत को उनकी कोई चिंता नजर नहीं आ रही है।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए नेगी ने कहा कि दो माह से वेतन नहीं मिलने के कारण इन कार्मिकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सवाल यह है कि आखिर इन कर्मचारियों का घर-परिवार कैसे चल रहा होगा, उन्होंने मकान का किराया दिया या नहीं, बच्चों की स्कूल फीस भरी या नहीं—इन तमाम समस्याओं से विभागीय मंत्री का कोई सरोकार दिखाई नहीं देता।
उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मंत्री की कार्यशैली देखकर प्रतीत होता है कि वह गहरी नींद अथवा ‘कोमा’ जैसी स्थिति में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि शिक्षा विभाग ने समय रहते भारत सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर वेतन की व्यवस्था क्यों नहीं की, ताकि कर्मचारियों को समय पर उनका पारिश्रमिक मिल सके।
नेगी ने आरोप लगाया कि विभागीय मंत्री को कर्मचारियों की समस्याओं से अधिक अपने आर्थिक संसाधन बढ़ाने की चिंता है। उन्होंने कहा कि आज तक मंत्री अपने अधीन विभागों में कार्यरत किसी भी कर्मचारी वर्ग के हितों के लिए प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाए हैं।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर ऐसे गैर-जिम्मेदार मंत्री को सरकार क्यों ढो रही है? जनता के टैक्स के लाखों रुपये प्रतिमाह मंत्री पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यदि मंत्री अपने विभागों की मूलभूत जिम्मेदारियों का निर्वहन ही नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें मंत्रिमंडल में बनाए रखने का औचित्य क्या है?
मोर्चा अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि बीआरपी-सीआरपी कार्मिकों के वेतन का शीघ्र भुगतान नहीं किया गया तो जन संघर्ष मोर्चा ऐसे गैर-जिम्मेदार रवैये के खिलाफ आंदोलन करेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि कर्मचारियों और विभागीय व्यवस्थाओं के प्रति कथित रूप से उदासीन मंत्री धन सिंह रावत को मंत्रिमंडल से बाहर किया जाए।
पत्रकार वार्ता में हाजी असद एवं प्रवीण शर्मा पिन्नी भी मौजूद रहे।
