देहरादून, 21 जुलाई। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जल जीवन मिशन के तहत संचालित अधूरी पेयजल परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्यों की प्रगति सुनिश्चित की जाए, ताकि लंबित केंद्रीय सहायता समय पर प्राप्त हो सके।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक में डीएम ने जल जीवन मिशन के दूसरे चरण की लंबित योजनाओं को तेजी से पूरा करने, पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं का थर्ड पार्टी निरीक्षण (टीपीआई) और ‘हर घर जल’ प्रमाणन की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान चकराता और सहसपुर विकासखंड के कई राजस्व गांवों में ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समितियों का गठन नहीं होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत) के वेतन आहरण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए और सभी ग्राम पंचायतों में समितियों का शीघ्र पुनर्गठन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
डीएम ने थर्ड पार्टी निरीक्षण में हो रही देरी पर भी संबंधित एजेंसियों को फटकार लगाते हुए कहा कि जिन परियोजनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है, उनका निरीक्षण और वित्तीय समापन बिना विलंब के कराया जाए। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा व्यक्तिगत एवं सामुदायिक शौचालय निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में बताया गया कि जनपद के 1,29,491 ग्रामीण परिवारों में से 1,29,449 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। फेज-1 की सभी 333 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि फेज-2 की 760 योजनाओं में से 734 पूर्ण हो चुकी हैं और 26 पर कार्य जारी है। इनमें तीन योजनाएं वन भूमि स्वीकृति के कारण लंबित हैं।
अधिकारियों ने बताया कि 635 गांवों में से 596 गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणन मिल चुका है, जबकि 33 गांवों में प्रक्रिया जारी है। फेज-2 की कुल 616.33 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के सापेक्ष अब तक 408.04 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 208.29 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिलनी बाकी है।
ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समितियों की समीक्षा में सामने आया कि 635 राजस्व गांवों में से अब तक केवल 298 गांवों में ही समितियों का गठन हुआ है। कालसी विकासखंड में सभी समितियां गठित हो चुकी हैं, जबकि चकराता, सहसपुर, डोईवाला, रायपुर और विकासनगर के कई गांवों में गठन अभी शेष है।
