वरिष्ठ पत्रकार मुकेश जुयाल की कलम से

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कांग्रेस की राजनीति में रामशरण नौटियाल की वापसी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके रामशरण नौटियाल का दिल्ली में कांग्रेस में शामिल होना महज एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि कांग्रेस उनके अनुभव और राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल किस विधानसभा क्षेत्र में करेगी। चकराता के साथ विकासनगर विधानसभा सीट भी इस चर्चा के केंद्र में आ गई है।

विकासनगर की राजनीति को समझने के लिए कांग्रेस के पुराने चुनावी समीकरणों पर नजर डालना जरूरी है। इस सीट पर कांग्रेस अब तक पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात को प्रमुख चेहरा बनाती रही है। उत्तराखंड सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री रह चुके नवप्रभात का राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में पुराना जनाधार उनकी ताकत है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुन्ना सिंह चौहान ने 40,819 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी, जबकि नवप्रभात को 35,626 वोट मिले थे। दोनों के बीच महज 5,193 मतों का अंतर रहा। यह परिणाम बताता है कि विकासनगर में कांग्रेस के पास मुकाबले की जमीन मौजूद है, लेकिन सत्ता तक पहुंचने के लिए उसे अपनी रणनीति और चुनावी प्रबंधन को और मजबूत करना होगा।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कांग्रेस 2027 में विकासनगर सीट पर अपने पुराने चेहरे नवप्रभात पर ही भरोसा जताएगी या रामशरण नौटियाल के रूप में किसी नए विकल्प पर दांव लगाने की संभावना तलाशेगी? राजनीतिक चर्चाओं में नौटियाल का नाम संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए इस संभावना को अंतिम निर्णय के बजाय बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में समझना चाहिए।

रामशरण नौटियाल की राजनीतिक यात्रा इस चर्चा को और महत्वपूर्ण बनाती है। वे कांग्रेस में पहले भी रह चुके हैं और बाद में भाजपा में शामिल होकर 2022 में चकराता विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे। उस चुनाव में उन्होंने 27,417 वोट हासिल किए और दूसरे स्थान पर रहे। अब कांग्रेस में उनकी वापसी पार्टी को एक ऐसे नेता के साथ काम करने का अवसर देती है, जिसे भाजपा की चुनावी राजनीति और संगठन का भी अनुभव रहा है। लेकिन किसी नेता का पूर्व चुनावी प्रदर्शन अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं होता कि वह दूसरे विधानसभा क्षेत्र में भी वैसा ही जनसमर्थन जुटा लेगा।

विकासनगर में यदि रामशरण नौटियाल को संभावित प्रत्याशी के रूप में देखा जाता है, तो कांग्रेस के सामने कई स्तरों पर विचार करने की चुनौती होगी। पहला, क्या नौटियाल का स्थानीय जनाधार इतना मजबूत है कि वे भाजपा के मुन्ना सिंह चौहान को सीधी चुनौती दे सकें? दूसरा, क्या पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और नवप्रभात के समर्थक किसी नए चेहरे को सहजता से स्वीकार करेंगे? और तीसरा, क्या उम्मीदवार बदलने से कांग्रेस के वोटों में वास्तविक बढ़ोतरी होगी या पार्टी के भीतर ही नए मतभेद पैदा हो सकते हैं?

इन सवालों के जवाब कांग्रेस की चुनावी रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। नवप्रभात को नजरअंदाज करना भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। दो बार कैबिनेट मंत्री रहने का अनुभव, लंबे समय से क्षेत्र की राजनीति में सक्रियता और पिछला चुनावी प्रदर्शन उनके पक्ष में जाते हैं। दूसरी ओर, यदि कांग्रेस नेतृत्व यह मानता है कि विकासनगर में नए राजनीतिक समीकरणों के साथ चुनाव लड़ने की जरूरत है, तो नौटियाल जैसे नेता का विकल्प भी चर्चा में आ सकता है। असली चुनौती किसी एक चेहरे को आगे करने की नहीं, बल्कि ऐसा निर्णय लेने की होगी जिससे पार्टी की जीत की संभावनाएं मजबूत हों।

चकराता के संदर्भ में भी नौटियाल की वापसी को कम करके नहीं आंका जा सकता। वहां 2022 में उनका भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना और उल्लेखनीय मत हासिल करना उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा है। लेकिन कांग्रेस में वापसी के बाद वे किस क्षेत्र में अपनी भूमिका तय करते हैं, यह उनके अगले राजनीतिक कदम की दिशा निर्धारित करेगा। चकराता में संभावित दावेदारी और विकासनगर में उभरती चर्चा—दोनों ही उनके लिए अवसर भी हैं और राजनीतिक चुनौतियां भी।

दूसरी ओर, भाजपा के लिए भी यह घटनाक्रम संदेश देता है कि चुनाव से पहले नेताओं की आवाजाही और स्थानीय समीकरणों पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि, किसी नेता के कांग्रेस में शामिल होने को सीधे भाजपा के वोटों में गिरावट मान लेना जल्दबाजी होगी। वास्तविक असर तभी सामने आएगा, जब यह स्पष्ट होगा कि नौटियाल के साथ कितने समर्थक आते हैं, कांग्रेस उन्हें कितनी जिम्मेदारी देती है और वे जमीनी स्तर पर कितना सक्रिय होते हैं।

संपादकीय दृष्टि से रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी का सबसे बड़ा महत्व 2027 के चुनाव से पहले संभावित उम्मीदवारों की चर्चा को नया आयाम देना है। विकासनगर में नवप्रभात की स्थापित दावेदारी और नौटियाल के संभावित विकल्प के बीच कांग्रेस को संतुलन साधना होगा। पार्टी को यह तय करना है कि वह अनुभव और निरंतरता पर भरोसा करेगी या नए समीकरणों के सहारे चुनावी मुकाबले को धार देने की कोशिश करेगी।

अंततः विधानसभा चुनाव में किसी भी नेता की उपयोगिता का फैसला केवल उसके राजनीतिक अतीत या पार्टी बदलने से नहीं, बल्कि वर्तमान जनाधार, संगठनात्मक स्वीकार्यता और मतदाताओं के विश्वास से होगा। रामशरण नौटियाल की वापसी से विकासनगर में सियासी चर्चा जरूर तेज हो सकती है, लेकिन क्या कांग्रेस वास्तव में उन पर दांव लगाएगी और क्या इससे नवप्रभात की दावेदारी प्रभावित होगी। इन सवालों का उत्तर पार्टी के आगामी फैसलों में ही छिपा है।

2027 की चुनावी बिसात पर अभी मोहरे सज रहे हैं। विकासनगर में कांग्रेस किस चेहरे को आगे करेगी, यही आने वाले समय में जिले की राजनीति का एक महत्वपूर्ण सवाल बन सकता है।

By Mukesh Juyal

संपादक, आत्ममंथन जन मुद्दों का एक पक्षकार