देहरादून। नकली एवं कूटरचित दवाओं के निर्माण, विक्रय तथा ऑनलाइन कारोबार में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी एसटीएफ ने कहा कि ऐसे अपराध जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं और इनमें शामिल लोगों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने बताया कि नकली दवाओं के निर्माण, बिक्री और ऑनलाइन व्यापार में लिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 336 एवं 338, कॉपीराइट अधिनियम की धारा 63/65 तथा आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

एसएसपी एसटीएफ ने आमजन और दवा विक्रेताओं से अपील की है कि वे दवाओं की खरीद-बिक्री के दौरान पूरी सतर्कता बरतें तथा किसी भी संदिग्ध दवा, वेबसाइट या ऑनलाइन विक्रेता की सूचना तत्काल संबंधित विभाग अथवा पुलिस को दें, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

मरीजों और ग्राहकों के लिए जरूरी सावधानियां

नकली एवं कूटरचित दवाओं से बचाव के लिए मरीजों और उपभोक्ताओं को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार दवा खरीदते समय हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें और उसका बिल अवश्य लें। बिल में दवा का नाम, बैच नंबर तथा अन्य आवश्यक विवरण दर्ज होना चाहिए।

दवा की स्ट्रिप या पैकेजिंग पर अंकित QR कोड अथवा बारकोड को मोबाइल से स्कैन कर उसकी जानकारी सत्यापित करें। स्कैन करने पर दवा, निर्माता कंपनी, बैच नंबर एवं अन्य महत्वपूर्ण विवरण प्रदर्शित होते हैं, जिससे उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि की जा सकती है।

दवा के पैकेट पर लगे लेबल को ध्यानपूर्वक जांचें। वर्तनी की त्रुटियां, ओवर-प्रिंटिंग, धुंधली छपाई अथवा अन्य किसी प्रकार की विसंगति दिखाई दे तो दवा संदिग्ध हो सकती है। साथ ही बिल में अंकित बैच नंबर, निर्माण तिथि (Mfg.), समाप्ति तिथि (Exp.), अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) एवं अन्य विवरणों का उत्पाद पर अंकित जानकारी से मिलान अवश्य करें।

केंद्र सरकार ने 200 जीवनरक्षक दवाओं की प्रत्येक स्ट्रिप पर यूनिक कोड अनिवार्य किया है। QR कोड स्कैन करने पर संबंधित स्ट्रिप की जानकारी दिखाई देती है तथा यह रिकॉर्ड संबंधित दवा कंपनी के सर्वर पर भी दर्ज हो जाता है, जिससे दवा की सत्यता की पुष्टि करना आसान हो जाता है।

इसके अलावा यदि कोई विक्रेता किसी दवा पर असामान्य या अत्यधिक छूट का प्रलोभन दे रहा हो तो विशेष सावधानी बरतें। कई मामलों में नकली या संदिग्ध दवाओं की बिक्री के लिए भारी छूट का लालच दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लिए अपने स्वास्थ्य और जीवन को जोखिम में डालना उचित नहीं है। इसलिए दवा खरीदते समय पूरी सतर्कता बरतें और किसी भी संदिग्ध दवा की सूचना संबंधित विभाग या पुलिस को दें।

दवा विक्रेताओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

नकली एवं कूटरचित दवाओं के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए दवा विक्रेताओं को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार दवाओं की खरीद केवल लाइसेंसधारी एवं अधिकृत थोक विक्रेताओं (होलसेलर्स) से ही की जानी चाहिए। किसी भी दवा की खरीद के समय बिल, जीएसटी विवरण, बैच नंबर तथा आपूर्ति स्रोत का सत्यापन अवश्य करें।

दवा विक्रेताओं को ऐसे व्यक्तियों से विशेष सावधान रहने की सलाह दी गई है जो मेडिकल स्टोर पर आकर या फोन कॉल के माध्यम से बाजार मूल्य से अत्यधिक कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव देते हैं। कई मामलों में नकली दवा आपूर्ति करने वाले गिरोह फर्जी बिलों एवं कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग करते हैं। इसलिए प्रत्येक दस्तावेज की सावधानीपूर्वक जांच करना आवश्यक है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संचालित ऑनलाइन दवा विक्रेता पेजों पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। ऐसे कई फर्जी विक्रेता नकली या अवैध लाइसेंस का उपयोग कर उपभोक्ताओं और दवा विक्रेताओं को धोखा देने का प्रयास करते हैं। ये फर्जी खातों में भुगतान प्राप्त कर नकली दवाएं कूरियर के माध्यम से भेज सकते हैं। इसलिए ऑनलाइन दवा खरीद-बिक्री केवल अधिकृत एवं पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही की जानी चाहिए।

By atmamanathan

संपादक, आत्ममंथन जन मुद्दों का एक पक्षकार

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