पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी कलह और टूट-फूट का दौर जारी है। पार्टी को बड़ा झटका देते हुए 20 सांसदों ने टीएमसी से अलग होने का फैसला किया है।
इस संबंध में बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि बंगाल की जनता ने टीएमसी को नकार दिया है। उनके अनुसार, चुनावी पराजय के बाद पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता असंतुष्ट हैं, जिसके चलते वे पार्टी से दूरी बना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी शासनकाल के दौरान हुए कथित अत्याचारों और विवादों से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा, जिसका असर चुनावी परिणामों में भी देखने को मिला।
वहीं भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे टीएमसी का आंतरिक मामला बताते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारवाद और नेतृत्व से जुड़े विवादों के कारण पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा है। पूनावाला ने दावा किया कि टीएमसी के भीतर अब नेतृत्व और संगठन को लेकर गंभीर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं।
हालांकि, टीएमसी की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है, यह सामने आना बाकी है।
