देहरादून | प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत–2047” के विज़न को साकार करने की दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी), अनुसंधान फार्म, सेलाकुई द्वारा विकासखंड सहसपुर के तिलवाड़ी गांव में बाँस एवं लेमनग्रास मॉडल प्रदर्शन इकाई (Model Demonstration Unit–MDU) की स्थापना की गई। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन, जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना, किसानों की आय में वृद्धि तथा ग्रामीण विकास को गति प्रदान करना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आईसीएआर गवर्निंग बॉडी के सदस्य, राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त एवं उत्तराखण्ड सरकार की जड़ी-बूटी सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री भुवन डबराल ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, टिकाऊ कृषि तकनीकों का प्रसार तथा ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी विकसित भारत–2047 के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बाँस एवं सुगंधित फसलों पर आधारित कृषि प्रणाली किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाएगी।
आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी के पादप विज्ञान प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. जग मोहन सिंह तोमर ने संस्थान द्वारा विकसित मृदा एवं जल संरक्षण, जलागम प्रबंधन, कृषि वानिकी, बाँस उत्पादन, सुगंधित फसलों तथा जलवायु अनुकूल कृषि से संबंधित वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी किसानों को दी और उन्हें इन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. राजेश कौशल, प्रधान वैज्ञानिक एवं डॉ. अनुपम बराह, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बाँस एवं लेमनग्रास मॉडल प्रदर्शन इकाई का प्रदर्शन करते हुए किसानों को वैज्ञानिक खेती, रोपण तकनीक, फसल प्रबंधन, मूल्य संवर्धन तथा इन फसलों की आयवर्धक क्षमता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये तकनीकें मृदा एवं जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख सहसपुर श्रीमती अर्चना रावत, ग्राम प्रधान तिलवाड़ी, श्री मुकेश नेगी, श्री यशपाल नेगी, श्री सिकंदर सिंह, भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष श्री रजनीश शर्मा, श्री मनजीत, श्री अखिलेश, श्रीमती बाला देवी, श्रीमती उनियाल सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी द्वारा स्थापित बाँस एवं लेमनग्रास मॉडल प्रदर्शन इकाई की सराहना करते हुए इन तकनीकों को अपनाने में गहरी रुचि व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, ग्राम विकास, किसानों की आय में वृद्धि तथा विकसित भारत–2047 के लक्ष्य को साकार करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
