देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के पछवादून प्रवक्ता पीयूष प्रताप सिंह नेगी ने प्रदेश में उच्च शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के अवसरों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए उत्तराखंड में IIT, IIM, बड़े शोध संस्थानों और आईटी कंपनियों की स्थापना की मांग उठाई है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के भविष्य को लेकर अब गंभीर चिंतन और ठोस कार्यवाही की आवश्यकता है। आज भी प्रदेश में बड़े शैक्षणिक एवं औद्योगिक संस्थानों का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हर वर्ष करोड़ों पर्यटक उत्तराखंड आते हैं और देश-विदेश के निवेशक यहां व्यवसाय की संभावनाएं तलाश सकते हैं, तो फिर बड़े शिक्षण संस्थान, अनुसंधान केंद्र और आईटी कंपनियां राज्य में क्यों नहीं स्थापित हो सकतीं।
पीयूष नेगी ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद सहित अन्य राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता है। इससे न केवल प्रतिभा पलायन बढ़ता है बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति भी प्रभावित होती है।
उन्होंने देश की प्रमुख आईटी, औद्योगिक और अनुसंधान संस्थाओं से उत्तराखंड को अपने विस्तार की योजनाओं में प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उनका कहना है कि उत्तराखंड के युवाओं में प्रतिभा, क्षमता और मेहनत की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल अवसर, निवेश और दूरदर्शी नीति की है।
यूकेडी नेता ने केंद्र और राज्य सरकारों से भी आत्ममंथन करने की अपील करते हुए कहा कि ऐसी कौन-सी बाधाएं हैं जिनके कारण बड़े संस्थान और उद्योग उत्तराखंड में आने से हिचकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड पर्यटन, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है, तो शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर का केंद्र बन सकता है।
उन्होंने कहा कि अब समय केवल चर्चा का नहीं, बल्कि ठोस पहल, दूरदर्शी नीति और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का है। उत्तराखंड के युवाओं को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
